Friday, December 7, 2012

Reason


आँखो से यू सपना उतर गया..
ख्वाबो का जॅहा हक़ीकत मे बदल गया..
जो कभी रात के आगोश मे था..
वो पलके झुकने से पहले.. जीने की वजह बन गया ||

Thursday, August 30, 2012

Placecom ki kalam se ..... by Himanshu Goyal

तू जो साथ होता तो लगता था सारा जहाँ है मेरा
तेरे मिलने से लगता था दिन का कोई सवेरा.
ए मेरे दोस्त तकदीर ने ऐसा क्या मुझसे मूह फेरा
अब तो ऐसा लगने लगा है जैसे जागता हूँ तो अंधेरा और सोता हूँ तो अंधेरा

Sunday, August 12, 2012

Aim

प्यास नही प्याले को लेकिन… प्यासा कितनो को करता है
डूब नशे मे ये मन याद कितनो को करता है
अजनबी हो गए है  खुद के लिए
अब उस मंज़िल तक कैसे पहुचे  जिसे  रस्ता ही बदलता  है

Saturday, July 28, 2012

Lodestar

पानी की बहती काया मैं...परछाई का रूप झलकता है
काग़ज़ पर चलती स्याही मैं...खुद का स्वरूप छलकता है
सीमाओ मैं ना बँधा हुआ...अनजान राह पर चलता हुआ
जो कभी हारा सा लगता था वो ध्रुवतारा चमकता है

Tuesday, June 12, 2012

priceless

ना चाहा है किसी पल को …. ना पाया है उसी कल को
ना पाने को .. ना खोने को …. बस ये ख्वाब है यू संजो ने को
ज़माने ने तो हमेशा मोल से ही तोला है
पर जब सब्र ना हो हक़ीकत को ….. तब है ये ख्वाब भी अनमोल होने को

Sunday, June 3, 2012

Pray

आस्मा से कभी फूलों की बारिश हो जाए
कलियों की खुशबू मे ये ज़िंदगानी खो जाए
शब्दो की भी … जिंदा कहानी हो जाए
और सारी दुनिया अपनी हो जाती है
जो बस एक उसकी मेहरबानी हो जाए

Saturday, June 2, 2012

Smiling moment

हर कल बदलता है जो दिन...उतना ही हैरान हू मैं
मुड़ कर कितना देखा ...पर ना कोई पहचान कौन हू मैं 
बदलने को तो इन आँखो के मंज़र कम नही बदले
पर हर बार मुस्कुराती ज़िंदगानी को लिखता एक लम्हा हू मैं 

Tuesday, May 29, 2012

Colour of Air

कभी खुल कर नही बोला...पर मे झुक भी नही पाया
हवाओ के इशारो पर... मगर मे बह भी नही पाया
समझकर भी समझता ही रह गया… उन सपनो के रंगो को... 
कभी वो मुझमे रच नही पाए... कभी मे उनमे घुल नही पाया

Words worth

इन नज़रो मे नही अंधेरा …. कोई उजाला भी करता है
आँखो का उतरा काजल … कभी क्या काला भी करता है
कितने बिखरे है .. कितना टूटे है
बस ये शब्द ही है जो खामोश रहकर भी निखरे है

Monday, May 21, 2012

Fly High

बदलना लाख चाहो पर .. ज़माना रोक देता है
सहज कोई देख कर भी … यू  नज़र फेर लेता है
हमे तो हमारी दिल लगी ने इतना सिखाया है
हमे तो हमारी  ख़ुशनसीबी  ने  इतना सिखाया है
की करम कोई  भी हो जैसा  … सिला भी वही देता है
हर बार  उमड़ी उड़ानो को ..अस्मा भी वही देता है

Wednesday, May 9, 2012

Pen Drink

कलम के कदम बहके है.. तो समझा हू
बिखरी बिखरी सिल्वटो की ... रेशम मैं उलझा हू
मुस्कुराते हुए हमने भी तो तुमको सिला दी है ...
कसूर ए गम का क्या जानू... नूरे प्रेम मैं जो उलझा हू

Aks

कोई अंतर नही दिखता... पर मैं पा भी नही सकता
कोई अंतर नही दिखता... पर मैं  छू भी नही सकता 
इलाही क्या ये शबब है... जो मैं चाह भी नही सकता
हमे तो भूल कर भी याद है... नूरे चहरा किसी का
मगर उस चहरे की नज़रो  मैं... अपना अक्स बसा नही सकता 

Monday, April 30, 2012

NPV

जन्नत के सितारो ने ... परखा है
उम्म्मीद के नज़रानो ने देखा है
जिस कल को सवेरेंगे हम कभी
उस पल पर आज भी हमारी ही रूपरेखा है

Sun shine

भूलना चाहते थे जिस पल को...उसे याद करना नही आया
सूरज की रोशनी मे भी...वो चाँद का मान नही आया
जहा चाहा वहाँ हँस के देखा ...
पर हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया
अकेली रात मे चमकते रहे तारे …  अमावस मे चाँद का स्वरूप नई आया
बांसुरी की धुन पर बहकती रही गोपिया...  राधा संग घनश्याम नही आया
स्वयं को कितना वास्ता दिया है …. हमे तो जीवन ने ही रास्ता दिया है
वरना तो अमरता चाहते थे पर... ज़हर पीना नही आया...
हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया ...

Friday, April 6, 2012

Mirror

तू दिखाए रात मे दिन ... तो दिन देखू
तू दिखाए अंधेरे मे उजाला... तो उजाला देखू
तूने दिखाया रातो का रंग दीवाना तो दीवाना  देखू
और ज़रा मेरे हाथ मे रख दे आईना भी  ... कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखू

Tuesday, April 3, 2012

Rememberance

रूह की  चाह है ...  बोल  रही आवाज़ है
ढल गई शाम पर ... अभी कहाँ  ऐतबार  है
गुफ्तगू  साथ है ... जैसे आज की ही बात है
--
शाम फिर आएगी ... ये मतवाला सा अहसास है
घुलती हुई प्यास को ... सब्र की ही तो आस है
नशा है कोई उन आँखो मे ... राज़ भी है क्या.. उन बातो मे
जो पल पल चलती सांसो को ... बस वही चेहरा याद है

Saturday, March 24, 2012

Audacity

गुरूरे मदहोश है वो चहरा … की चाहने वाले इतने है …
सूरज की रोशनी मे और चांद की चांदनी मे देखने वाले कितने है …
मल्लिकाए हुस्न के आगोश मे…  कोई इस साहित्य को भी लाए...
की जिन निगाहो ने तराशा हो संगमरमर को … उन नज़रो का दीदार करते ताज महल कितने है

Wednesday, March 21, 2012

Intrinsic

हवाओ का ज़ोर इस शम्मा को जगा देगा
हुज़ूम का शोर भी.. क्या शख्सियत दबा देगा
कोई बता दे उन्हे ...इस चिंगारी को सहारा है … हिम्मते मशाल का
अब तो दुआओं का असर भी दर्द उभार देगा ....

Dream Drive

राह पर चलते हुए क्यू गुमान इतना करता है
चूर हुए सपने पर भरोसा क्यू इतना करता है
जाना नही मंज़िल का रास्ता... अभी तो सब खुला असमा लगता है
अब तो हर आती लहर मे सुनामी सा कहर.. और .. ख्वाबो का अफ़साना सजता है

Tuesday, March 20, 2012

Monsoon

लहरो का शुमार…  समंदर का चिराग होता है
महफ़िल मे सजी जाम का … हर दिल को इन्तेज़ार  होता है
बारिश के मौसम ने छुपा रखा है आँखो का सुरूर
वरना तो अब हम पर दुआओं का असर भी नाग्वार होता है ....

Invincible*/\*

यू आँधी का चलना … अब इस लौ को और बड़ा देगा
मोम का पिघलना ... इस रोशनी  को ना ढाला देगा
हमे तो सहारा है दोस्तो का … तो दुश्मन क्या दगा देगा

Friday, March 16, 2012

Jingle bell

खुशी मे झूम कर भी … हम तो पार जाते है                  
मुस्कुराते हुए भी कदम लड़खड़ा जाते है                        
....
अक्सर लगता है  आँखो मे है सपने अपने                   
पर नमी का एहसास कराते घुल जाते है ख्वाब कितने    
....
समझा इस पहेली को ...हुई क्यू ये रुसवाई                   
बस अब तो नज़रे अपनी है … नीन्द हुई पराई             
....
आज भी समझता है जमाना कि खुशी मे झूम रहा था दीवाना   
प्रीत हुई थी पराई ... फिर भी महक रहा था बेगाना                   
....                                                                                        
अब तो सबको जाननी है ये  बात ... जीवन चक्र तो है सुख दुख की सौगात  
सूरज का तेज है..तारो का प्रवेग है... सिर्फ़ ना रहे किसी जीवन मे रात      
....                                                                                                                                                                                                                                                                                    
समय तो बहती हुई नहर है ... इसको ना भेद पता है                  
पर रब को सब खास पता है ... सबकी अरदास पता है              
ओर जो पानी मे घुल जाए बस उसको प्यास पता है                 

Tuesday, March 13, 2012

Happy Giving

दूर तक देखोगे... तब भी तो अड़चन है
यू उपर सिर उठाकर साहस से समझो गे तो अंबर है
पाने को तो  खोया ही क्या है
ह्रदय के सागर से अर्पित करने मे ही हर उलझन की सुलझन है

Treaty * Peace

अमन का संदेशा लिए आती है ये सोंधी खुश्बू
हिमालय से सर्द हवओ का झोका लेके ...आती है ये सोंधी खुश्बू
गर्मी मे भी नमी का एहसास कराती है ये सोंधी खुश्बू
उड़ती चिड़िया को सीमा पार कराती है ये सोंधी खुश्बू
एक फोजी के साहस का... पर्वत के अभिमान का
और देश के गौरव का संज्ञान कराती है ये सोंधी खुश्बू
अमन का संदेशा लिए आती है ये सोंधी खुश्बू

Sunday, March 11, 2012

Star Wars

काजल ने चंदा से पूछा है यू...
कितने है सारे ये तारे... फिर भी तुम हो क्यू ...
सब तो जगमगाते है ... खिलखिलाते है... नज़राना दे जाते है पर तुम हो क्यू... 

चांद ने भी कुछ तो कहा

करो ना मुझको यू ऐसे ही शर्मिन्दा... मेरा भी तो अपना मान है... सब जो दिखते चॅम चमाते वो मेरी ही तो शान है...
चांद बिन चांदनी रात नही होती... जैसे बिन बदल बरसात नही होती 
खाली जो तारो का होता आसमान तो जैसे बिन बूंदो की बारिश ... जैसे ख्वाहिश बिन गुजारिश...

पार से देखोगे तो अंबर लगेगा समान ... छुपाने पर भी ना छुपता ऐसा मेरा गुमान
अंधेरी रात मे देता हू मे सूरज सा प्रवेग... ढलती हुई रोशनी मे सबका स्वरूप एक
दिन भर की थकान मिटाते इन तारो की झिलमिल है ... पर  काजल इन जगमगाते सितारो का भी तो चांद सा दिल है

काजल ने भी समझी ये बात... अब तो चाँद को भी दिया उसने दाग ...
कितने ही सवाल उठाए... इतना किया उपहास...
पर फिर भी बरसो से उन धब्बो को लिए... खुले आसमान मे चंदा ही सबसे साफ... 

Saturday, March 10, 2012

Mummy

नज़र के झरोके मे होकर... दिल के उस पालने मे झूलकर
सुकून कितना मिलता था... जब सुबह का सूरज मा की आँखो मे दिखता था
......
जगह जगह बिखरी रहती थी रंगोली... जब आँगन मे आ जाती थी संजोली
देर सवेर उठते थे... गाते थे गाना... इचक दाना इचक दाना
......
मा कहती थी
बोहुत हुआ ये शोर... अब कम अपनी आवाज़ करो... चलो जाकर अपना काम करो
पर हम मे भी थी हट इतनी की रूठ जाएँगे पर बाज़ ना आएँगे...
........
मा कहती थी
अब तो पड़ लो संध्या हो गयी नंद लाला... मन खूब लगाते थे विद्या अर्जन मे
पर उड़ती पतंग को देख फिर मन इठलाता था... और शाम का सूरज यूही ढल जाता था
रात को सुनाती थी मा लोरी.... हम कहते थे मा और एक स्टोरी...
सच सब कितना प्यारा सहारा था
.........
वो मौसम का बदलना अब क्यू नही रास आता, यू आँधी का निकलना क्यू सावन नही लाता...
इस आधुनिकता मे  क्यू खो गए इतना... की जो अपने थे वो भी रह गए दूर कितना...
........
पर आज भी ये सैलाब यश तक नही पहुचा... बस सपनो का मंज़र है जो किसी ने नही सोचा
अब तो खुद को रोक लो ... जो ग़लती की वो सोच लो ...
..........
किनारा अभी दूर नही... मझधार मे संकोच नही...
ये तूफान से पहले का सन्नाटा है कोई खुशहाली का संकेत नही

Thursday, March 8, 2012

Happy holi

होली का ये त्योहार आया...  संग अपने बिखेरता प्यार लाया
हाथो मे रंग लिए... आँखो मे उमंग लिए... फिर ये दिन खुशहाली का आया

सबके मान को भाएगा.. हर सपना पूर्ण हो जाएगा
मन्नत को सजाए रखना... उसमे फूल खुशी के खिलाएगा
दरवाजे पर ये देगा दस्तक... कहा बचोगे इन रंगीन फिजाओ से तब तक
होली का ये त्योहार आया... संग अपने बिखेरता प्यार लाया
हाथो मे रंग लिए... आँखो मे उमंग लिए... फिर ये दिन खुशहाली का आया