भूलना चाहते थे जिस पल को...उसे याद करना नही आया
सूरज की रोशनी मे भी...वो चाँद का मान नही आया
जहा चाहा वहाँ हँस के देखा ...
पर हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया
अकेली रात मे चमकते रहे तारे … अमावस मे चाँद का स्वरूप नई आया
बांसुरी की धुन पर बहकती रही गोपिया... राधा संग घनश्याम नही आया
स्वयं को कितना वास्ता दिया है …. हमे तो जीवन ने ही रास्ता दिया है
वरना तो अमरता चाहते थे पर... ज़हर पीना नही आया...
हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया ...
सूरज की रोशनी मे भी...वो चाँद का मान नही आया
जहा चाहा वहाँ हँस के देखा ...
पर हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया
अकेली रात मे चमकते रहे तारे … अमावस मे चाँद का स्वरूप नई आया
बांसुरी की धुन पर बहकती रही गोपिया... राधा संग घनश्याम नही आया
स्वयं को कितना वास्ता दिया है …. हमे तो जीवन ने ही रास्ता दिया है
वरना तो अमरता चाहते थे पर... ज़हर पीना नही आया...
हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया ...

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