भूलना चाहते थे जिस पल को...उसे याद करना नही आया
सूरज की रोशनी मे भी...वो चाँद का मान नही आया
जहा चाहा वहाँ हँस के देखा ...
पर हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया
अकेली रात मे चमकते रहे तारे … अमावस मे चाँद का स्वरूप नई आया
बांसुरी की धुन पर बहकती रही गोपिया... राधा संग घनश्याम नही आया
स्वयं को कितना वास्ता दिया है …. हमे तो जीवन ने ही रास्ता दिया है
वरना तो अमरता चाहते थे पर... ज़हर पीना नही आया...
हर एक पल मुस्कुरा के गम पीना नही आया ...
तू दिखाए रात मे दिन ... तो दिन देखू
तू दिखाए अंधेरे मे उजाला... तो उजाला देखू
तूने दिखाया रातो का रंग दीवाना तो दीवाना देखू
और ज़रा मेरे हाथ मे रख दे आईना भी ... कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखू
रूह की चाह है ... बोल रही आवाज़ है
ढल गई शाम पर ... अभी कहाँ ऐतबार है
गुफ्तगू साथ है ... जैसे आज की ही बात है
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शाम फिर आएगी ... ये मतवाला सा अहसास है
घुलती हुई प्यास को ... सब्र की ही तो आस है
नशा है कोई उन आँखो मे ... राज़ भी है क्या.. उन बातो मे
जो पल पल चलती सांसो को ... बस वही चेहरा याद है