गुरूरे मदहोश है वो चहरा … की चाहने वाले इतने है …
सूरज की रोशनी मे और चांद की चांदनी मे देखने वाले कितने है …
मल्लिकाए हुस्न के आगोश मे… कोई इस साहित्य को भी लाए...
की जिन निगाहो ने तराशा हो संगमरमर को … उन नज़रो का दीदार करते ताज महल कितने है
सूरज की रोशनी मे और चांद की चांदनी मे देखने वाले कितने है …
मल्लिकाए हुस्न के आगोश मे… कोई इस साहित्य को भी लाए...
की जिन निगाहो ने तराशा हो संगमरमर को … उन नज़रो का दीदार करते ताज महल कितने है

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