राह पर चलते हुए क्यू गुमान इतना करता है
चूर हुए सपने पर भरोसा क्यू इतना करता है
जाना नही मंज़िल का रास्ता... अभी तो सब खुला असमा लगता है
अब तो हर आती लहर मे सुनामी सा कहर.. और .. ख्वाबो का अफ़साना सजता है
चूर हुए सपने पर भरोसा क्यू इतना करता है
जाना नही मंज़िल का रास्ता... अभी तो सब खुला असमा लगता है
अब तो हर आती लहर मे सुनामी सा कहर.. और .. ख्वाबो का अफ़साना सजता है

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