Sunday, March 11, 2012

Star Wars

काजल ने चंदा से पूछा है यू...
कितने है सारे ये तारे... फिर भी तुम हो क्यू ...
सब तो जगमगाते है ... खिलखिलाते है... नज़राना दे जाते है पर तुम हो क्यू... 

चांद ने भी कुछ तो कहा

करो ना मुझको यू ऐसे ही शर्मिन्दा... मेरा भी तो अपना मान है... सब जो दिखते चॅम चमाते वो मेरी ही तो शान है...
चांद बिन चांदनी रात नही होती... जैसे बिन बदल बरसात नही होती 
खाली जो तारो का होता आसमान तो जैसे बिन बूंदो की बारिश ... जैसे ख्वाहिश बिन गुजारिश...

पार से देखोगे तो अंबर लगेगा समान ... छुपाने पर भी ना छुपता ऐसा मेरा गुमान
अंधेरी रात मे देता हू मे सूरज सा प्रवेग... ढलती हुई रोशनी मे सबका स्वरूप एक
दिन भर की थकान मिटाते इन तारो की झिलमिल है ... पर  काजल इन जगमगाते सितारो का भी तो चांद सा दिल है

काजल ने भी समझी ये बात... अब तो चाँद को भी दिया उसने दाग ...
कितने ही सवाल उठाए... इतना किया उपहास...
पर फिर भी बरसो से उन धब्बो को लिए... खुले आसमान मे चंदा ही सबसे साफ... 

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