तू जो साथ होता तो लगता था सारा जहाँ है मेरा
तेरे मिलने से लगता था दिन का कोई सवेरा.
ए मेरे दोस्त तकदीर ने ऐसा क्या मुझसे मूह फेरा
अब तो ऐसा लगने लगा है जैसे जागता हूँ तो अंधेरा और सोता हूँ तो अंधेरा
तेरे मिलने से लगता था दिन का कोई सवेरा.
ए मेरे दोस्त तकदीर ने ऐसा क्या मुझसे मूह फेरा
अब तो ऐसा लगने लगा है जैसे जागता हूँ तो अंधेरा और सोता हूँ तो अंधेरा
