रूह की चाह है ... बोल रही आवाज़ है
ढल गई शाम पर ... अभी कहाँ ऐतबार है
गुफ्तगू साथ है ... जैसे आज की ही बात है
--
शाम फिर आएगी ... ये मतवाला सा अहसास है
घुलती हुई प्यास को ... सब्र की ही तो आस है
नशा है कोई उन आँखो मे ... राज़ भी है क्या.. उन बातो मे
जो पल पल चलती सांसो को ... बस वही चेहरा याद है
ढल गई शाम पर ... अभी कहाँ ऐतबार है
गुफ्तगू साथ है ... जैसे आज की ही बात है
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शाम फिर आएगी ... ये मतवाला सा अहसास है
घुलती हुई प्यास को ... सब्र की ही तो आस है
नशा है कोई उन आँखो मे ... राज़ भी है क्या.. उन बातो मे
जो पल पल चलती सांसो को ... बस वही चेहरा याद है

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