खुशी मे झूम कर भी … हम तो पार जाते है
मुस्कुराते हुए भी कदम लड़खड़ा जाते है
....
अक्सर लगता है आँखो मे है सपने अपने
पर नमी का एहसास कराते घुल जाते है ख्वाब कितने
....
समझा इस पहेली को ...हुई क्यू ये रुसवाई
बस अब तो नज़रे अपनी है … नीन्द हुई पराई
....
आज भी समझता है जमाना कि खुशी मे झूम रहा था दीवाना
प्रीत हुई थी पराई ... फिर भी महक रहा था बेगाना
....
अब तो सबको जाननी है ये बात ... जीवन चक्र तो है सुख दुख की सौगात
सूरज का तेज है..तारो का प्रवेग है... सिर्फ़ ना रहे किसी जीवन मे रात
....
समय तो बहती हुई नहर है ... इसको ना भेद पता है
पर रब को सब खास पता है ... सबकी अरदास पता है
ओर जो पानी मे घुल जाए बस उसको प्यास पता है
मुस्कुराते हुए भी कदम लड़खड़ा जाते है
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अक्सर लगता है आँखो मे है सपने अपने
पर नमी का एहसास कराते घुल जाते है ख्वाब कितने
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समझा इस पहेली को ...हुई क्यू ये रुसवाई
बस अब तो नज़रे अपनी है … नीन्द हुई पराई
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आज भी समझता है जमाना कि खुशी मे झूम रहा था दीवाना
प्रीत हुई थी पराई ... फिर भी महक रहा था बेगाना
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अब तो सबको जाननी है ये बात ... जीवन चक्र तो है सुख दुख की सौगात
सूरज का तेज है..तारो का प्रवेग है... सिर्फ़ ना रहे किसी जीवन मे रात
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समय तो बहती हुई नहर है ... इसको ना भेद पता है
पर रब को सब खास पता है ... सबकी अरदास पता है
ओर जो पानी मे घुल जाए बस उसको प्यास पता है

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