Saturday, March 24, 2012

Audacity

गुरूरे मदहोश है वो चहरा … की चाहने वाले इतने है …
सूरज की रोशनी मे और चांद की चांदनी मे देखने वाले कितने है …
मल्लिकाए हुस्न के आगोश मे…  कोई इस साहित्य को भी लाए...
की जिन निगाहो ने तराशा हो संगमरमर को … उन नज़रो का दीदार करते ताज महल कितने है

Wednesday, March 21, 2012

Intrinsic

हवाओ का ज़ोर इस शम्मा को जगा देगा
हुज़ूम का शोर भी.. क्या शख्सियत दबा देगा
कोई बता दे उन्हे ...इस चिंगारी को सहारा है … हिम्मते मशाल का
अब तो दुआओं का असर भी दर्द उभार देगा ....

Dream Drive

राह पर चलते हुए क्यू गुमान इतना करता है
चूर हुए सपने पर भरोसा क्यू इतना करता है
जाना नही मंज़िल का रास्ता... अभी तो सब खुला असमा लगता है
अब तो हर आती लहर मे सुनामी सा कहर.. और .. ख्वाबो का अफ़साना सजता है

Tuesday, March 20, 2012

Monsoon

लहरो का शुमार…  समंदर का चिराग होता है
महफ़िल मे सजी जाम का … हर दिल को इन्तेज़ार  होता है
बारिश के मौसम ने छुपा रखा है आँखो का सुरूर
वरना तो अब हम पर दुआओं का असर भी नाग्वार होता है ....

Invincible*/\*

यू आँधी का चलना … अब इस लौ को और बड़ा देगा
मोम का पिघलना ... इस रोशनी  को ना ढाला देगा
हमे तो सहारा है दोस्तो का … तो दुश्मन क्या दगा देगा

Friday, March 16, 2012

Jingle bell

खुशी मे झूम कर भी … हम तो पार जाते है                  
मुस्कुराते हुए भी कदम लड़खड़ा जाते है                        
....
अक्सर लगता है  आँखो मे है सपने अपने                   
पर नमी का एहसास कराते घुल जाते है ख्वाब कितने    
....
समझा इस पहेली को ...हुई क्यू ये रुसवाई                   
बस अब तो नज़रे अपनी है … नीन्द हुई पराई             
....
आज भी समझता है जमाना कि खुशी मे झूम रहा था दीवाना   
प्रीत हुई थी पराई ... फिर भी महक रहा था बेगाना                   
....                                                                                        
अब तो सबको जाननी है ये  बात ... जीवन चक्र तो है सुख दुख की सौगात  
सूरज का तेज है..तारो का प्रवेग है... सिर्फ़ ना रहे किसी जीवन मे रात      
....                                                                                                                                                                                                                                                                                    
समय तो बहती हुई नहर है ... इसको ना भेद पता है                  
पर रब को सब खास पता है ... सबकी अरदास पता है              
ओर जो पानी मे घुल जाए बस उसको प्यास पता है                 

Tuesday, March 13, 2012

Happy Giving

दूर तक देखोगे... तब भी तो अड़चन है
यू उपर सिर उठाकर साहस से समझो गे तो अंबर है
पाने को तो  खोया ही क्या है
ह्रदय के सागर से अर्पित करने मे ही हर उलझन की सुलझन है

Treaty * Peace

अमन का संदेशा लिए आती है ये सोंधी खुश्बू
हिमालय से सर्द हवओ का झोका लेके ...आती है ये सोंधी खुश्बू
गर्मी मे भी नमी का एहसास कराती है ये सोंधी खुश्बू
उड़ती चिड़िया को सीमा पार कराती है ये सोंधी खुश्बू
एक फोजी के साहस का... पर्वत के अभिमान का
और देश के गौरव का संज्ञान कराती है ये सोंधी खुश्बू
अमन का संदेशा लिए आती है ये सोंधी खुश्बू

Sunday, March 11, 2012

Star Wars

काजल ने चंदा से पूछा है यू...
कितने है सारे ये तारे... फिर भी तुम हो क्यू ...
सब तो जगमगाते है ... खिलखिलाते है... नज़राना दे जाते है पर तुम हो क्यू... 

चांद ने भी कुछ तो कहा

करो ना मुझको यू ऐसे ही शर्मिन्दा... मेरा भी तो अपना मान है... सब जो दिखते चॅम चमाते वो मेरी ही तो शान है...
चांद बिन चांदनी रात नही होती... जैसे बिन बदल बरसात नही होती 
खाली जो तारो का होता आसमान तो जैसे बिन बूंदो की बारिश ... जैसे ख्वाहिश बिन गुजारिश...

पार से देखोगे तो अंबर लगेगा समान ... छुपाने पर भी ना छुपता ऐसा मेरा गुमान
अंधेरी रात मे देता हू मे सूरज सा प्रवेग... ढलती हुई रोशनी मे सबका स्वरूप एक
दिन भर की थकान मिटाते इन तारो की झिलमिल है ... पर  काजल इन जगमगाते सितारो का भी तो चांद सा दिल है

काजल ने भी समझी ये बात... अब तो चाँद को भी दिया उसने दाग ...
कितने ही सवाल उठाए... इतना किया उपहास...
पर फिर भी बरसो से उन धब्बो को लिए... खुले आसमान मे चंदा ही सबसे साफ... 

Saturday, March 10, 2012

Mummy

नज़र के झरोके मे होकर... दिल के उस पालने मे झूलकर
सुकून कितना मिलता था... जब सुबह का सूरज मा की आँखो मे दिखता था
......
जगह जगह बिखरी रहती थी रंगोली... जब आँगन मे आ जाती थी संजोली
देर सवेर उठते थे... गाते थे गाना... इचक दाना इचक दाना
......
मा कहती थी
बोहुत हुआ ये शोर... अब कम अपनी आवाज़ करो... चलो जाकर अपना काम करो
पर हम मे भी थी हट इतनी की रूठ जाएँगे पर बाज़ ना आएँगे...
........
मा कहती थी
अब तो पड़ लो संध्या हो गयी नंद लाला... मन खूब लगाते थे विद्या अर्जन मे
पर उड़ती पतंग को देख फिर मन इठलाता था... और शाम का सूरज यूही ढल जाता था
रात को सुनाती थी मा लोरी.... हम कहते थे मा और एक स्टोरी...
सच सब कितना प्यारा सहारा था
.........
वो मौसम का बदलना अब क्यू नही रास आता, यू आँधी का निकलना क्यू सावन नही लाता...
इस आधुनिकता मे  क्यू खो गए इतना... की जो अपने थे वो भी रह गए दूर कितना...
........
पर आज भी ये सैलाब यश तक नही पहुचा... बस सपनो का मंज़र है जो किसी ने नही सोचा
अब तो खुद को रोक लो ... जो ग़लती की वो सोच लो ...
..........
किनारा अभी दूर नही... मझधार मे संकोच नही...
ये तूफान से पहले का सन्नाटा है कोई खुशहाली का संकेत नही

Thursday, March 8, 2012

Happy holi

होली का ये त्योहार आया...  संग अपने बिखेरता प्यार लाया
हाथो मे रंग लिए... आँखो मे उमंग लिए... फिर ये दिन खुशहाली का आया

सबके मान को भाएगा.. हर सपना पूर्ण हो जाएगा
मन्नत को सजाए रखना... उसमे फूल खुशी के खिलाएगा
दरवाजे पर ये देगा दस्तक... कहा बचोगे इन रंगीन फिजाओ से तब तक
होली का ये त्योहार आया... संग अपने बिखेरता प्यार लाया
हाथो मे रंग लिए... आँखो मे उमंग लिए... फिर ये दिन खुशहाली का आया