हर कल बदलता है जो दिन...उतना ही हैरान हू मैं
मुड़ कर कितना देखा ...पर ना कोई पहचान कौन हू मैं
बदलने को तो इन आँखो के मंज़र कम नही बदले
पर हर बार मुस्कुराती ज़िंदगानी को लिखता एक लम्हा हू मैं
मुड़ कर कितना देखा ...पर ना कोई पहचान कौन हू मैं
बदलने को तो इन आँखो के मंज़र कम नही बदले
पर हर बार मुस्कुराती ज़िंदगानी को लिखता एक लम्हा हू मैं

wah wah
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