दूर तक देखोगे... तब भी तो अड़चन है
यू उपर सिर उठाकर साहस से समझो गे तो अंबर है
पाने को तो खोया ही क्या है
ह्रदय के सागर से अर्पित करने मे ही हर उलझन की सुलझन है
यू उपर सिर उठाकर साहस से समझो गे तो अंबर है
पाने को तो खोया ही क्या है
ह्रदय के सागर से अर्पित करने मे ही हर उलझन की सुलझन है

0 comments:
Post a Comment